क्या सच में इजरायल ईरान में अपने सबसे बड़े दुश्मन को ही सत्ता सौंपने की तैयारी कर रहा था

क्या सच में इजरायल ईरान में अपने सबसे बड़े दुश्मन को ही सत्ता सौंपने की तैयारी कर रहा था

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और खुफिया एजेंसियों की दुनिया में कब कौन दोस्त बन जाए और कब कौन जानी दुश्मन, कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन जब खबर यह आए कि इजरायल की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के उस पूर्व राष्ट्रपति को अपना मोहरा बनाने की कोशिश की जो कभी इजरायल को नक्शे से मिटाने की बात करता था, तो पैरों तले जमीन खिसकना लाजिमी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने इसी हैरान कर देने वाले सच से पर्दा उठाया है। दावा किया जा रहा है कि इजरायल ने अपने कट्टर दुश्मन अहमदीनेजाद को ही ईरान का अगला नेता बनाने की कोशिश की। जी हां, वही महमूद अहमदीनेजाद जो कभी यहूदी संहार यानी होलोकॉस्ट को महज एक अफवाह बताते थे।

यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि सालों तक चले एक बेहद जटिल और खतरनाक सीक्रेट ऑपरेशन का हिस्सा था। इस खुफिया खेल की शुरुआत साल 2022 के आसपास हुई थी。 ईरान के भीतर बढ़ते राजनीतिक असंतोष और अहमदीनेजाद की अपनी महत्वाकांक्षाओं ने मोसाद को एक बड़ा मौका दे दिया। लेकिन क्या एक धुर इजरायल विरोधी नेता वाकई मोसाद के जाल में फंस गया था? आखिर वह कौन सी मजबूरियां थीं जिन्होंने अहमदीनेजाद को अपने सबसे बड़े दुश्मन के साथ हाथ मिलाने पर मजबूर कर दिया?


इजरायल ने अपने कट्टर दुश्मन अहमदीनेजाद को ही ईरान का अगला नेता बनाने की कोशिश की

यह पूरी कहानी जितनी अजीब है, उतनी ही हैरान करने वाली भी। महमूद अहमदीनेजाद साल 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। उनका कार्यकाल पूरी दुनिया में इजरायल के खिलाफ बेहद आक्रामक बयानों के लिए जाना जाता था। उन्होंने कई बार मंचों से कहा कि इजरायल को धरती से मिटा देना चाहिए। लेकिन सत्ता से हटने के बाद ईरान की मौजूदा धार्मिक सत्ता यानी आयतुल्लाह अली खामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ उनके रिश्ते लगातार खराब होते चले गए।

अहमदीनेजाद को लगने लगा था कि वह मौजूदा व्यवस्था में रहते हुए दोबारा कभी सत्ता में नहीं आ सकते। उन्हें अपनी वापसी के लिए एक बाहरी सहारे की जरूरत महसूस होने लगी। ठीक इसी समय इजरायल भी ईरान में तख्तापलट की स्थिति में एक ऐसे चेहरे की तलाश कर रहा था जो लोकलुभावन हो और जिसकी जनता के बीच मजबूत पकड़ हो। अहमदीनेजाद इस खांचे में पूरी तरह फिट बैठते थे।

इजरायली खुफिया एजेंसी ने इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। उन्होंने अहमदीनेजाद को ईरान के अगले नेता के रूप में तैयार करने की लंबी योजना बनाई। इस खुफिया मिशन का मकसद बेहद साफ था। ईरान की सत्ता गिरने पर अहमदीनेजाद को देश की बागडोर सौंपना ताकि वह नए शासक के रूप में इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य कर सकें।


बुडापेस्ट की वो खुफिया मुलाकात जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया

इस खुफिया ऑपरेशन का सबसे बड़ा केंद्र बना हंगरी का खूबसूरत शहर बुडापेस्ट। साल 2024 में बुडापेस्ट की लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक सर्विस में एक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन सम्मेलन आयोजित किया गया। दिखने में यह एक सामान्य अकादमिक कार्यक्रम था। लेकिन असल में यह मोसाद द्वारा तैयार की गई एक सोची-समझी ढाल थी।

लुडोविका यूनिवर्सिटी के रेक्टर प्रोफेसर गेरगेली डेली को हंगरी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विशेष रूप से अहमदीनेजाद को आमंत्रित करने के लिए कहा था। प्रोफेसर डेली ने बाद में स्वीकार किया कि उन्हें पहले से पता था कि यह आमंत्रण केवल एक बहाना है ताकि इजरायली खुफिया अधिकारी और अहमदीनेजाद आपस में गुप्त रूप से बातचीत कर सकें। वह इस बात से भी वाकिफ थे कि इससे उनकी यूनिवर्सिटी की साख पर आंच आ सकती है, लेकिन उन्हें लगा कि शायद वे दो बड़े दुश्मनों को करीब लाकर कई मासूमों की जिंदगी बचा रहे हैं।

इसी सम्मेलन के दौरान मोसाद के तत्कालीन चीफ डेविड बार्निया खुद बुडापेस्ट पहुंचे। उन्होंने अहमदीनेजाद से गुप्त रूप से मुलाकात की। यह मुलाकात इतनी अहम थी कि बार्निया ने इस बैठक के लिए बेंजामिन नेतन्याहू के साथ होने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा बैठक को भी टाल दिया था। इसके बाद मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) को भी इस संपर्क के बारे में जानकारी दे दी थी।

सिर्फ मुलाकातें ही नहीं हुईं। इजरायल ने अहमदीनेजाद के विदेशी दौरों, रहने और यात्रा के खर्चों के लिए भी मोटी रकम का भुगतान करना शुरू कर दिया था। साल 2023 में ग्वाटेमाला की यात्रा और फिर साल 2025 में दोबारा बुडापेस्ट के दौरे के दौरान भी मोसाद के एजेंट लगातार उनके संपर्क में रहे। 2025 की अपनी बुडापेस्ट यात्रा के दौरान तो अहमदीनेजाद दो बार अपनी सुरक्षा में तैनात ईरानी बॉडीगार्ड्स को चकमा देकर गायब हो गए थे ताकि वे इजरायली एजेंटों के साथ लंबी गुप्त बैठकें कर सकें।


खाकी जैकेट से सूट-बूट और बोटोक्स तक का सफर

इस सीक्रेट डील के दौरान महमूद अहमदीनेजाद के व्यक्तित्व और रूप-रंग में भी गजब का बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रपति रहते हुए वह हमेशा एक बेहद साधारण खाकी जैकेट पहनते थे और उनकी दाढ़ी बढ़ी रहती थी। वह पश्चिमी देशों के पहनावे से सख्त नफरत करते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपना पूरा हुलिया ही बदल डाला।

  • उन्होंने अपनी पुरानी खाकी जैकेट को छोड़कर महंगे सिलवाया हुआ सूट-बूट पहनना शुरू कर दिया।
  • उनकी बेतरतीब दाढ़ी अब सलीके से ट्रिम की जाने लगी थी।
  • चेहरे की झुर्रियों को छिपाने के लिए उन्होंने कथित तौर पर बोटोक्स ट्रीटमेंट भी कराया।
  • सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्होंने अंग्रेजी सीखनी शुरू कर दी और बुडापेस्ट में अपना भाषण भी अंग्रेजी में ही दिया।

यह बदलाव अचानक नहीं हुआ था। यह सब उन्हें एक उदारवादी और आधुनिक नेता के रूप में दुनिया के सामने पेश करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। वह खुद को रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन की तरह देख रहे थे, जो सोवियत संघ के पतन के बाद एक सुधारक के रूप में उभरे थे। अहमदीनेजाद के करीबियों के अनुसार, वह सत्ता में लौटने पर अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ संबंधों को पूरी तरह सामान्य करने के लिए भी तैयार हो चुके थे।


अमेरिकी हमले और सुरंगे बदलने की वो रात

इस पूरे ड्रामे का क्लाइमेक्स इस साल फरवरी के अंत में देखने को मिला। जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, तो 28 फरवरी को तेहरान स्थित अहमदीनेजाद के परिसर पर भी हवाई हमला हुआ। यह हमला दरअसल मोसाद द्वारा रची गई एक योजना का हिस्सा था ताकि अफरातफरी के बीच अहमदीनेजाद को उनके सुरक्षा घेरे से बाहर निकाला जा सके।

हमले के तुरंत बाद एक काली प्यूजो (Peugeot) कार वहां पहुंची। मोसाद के एजेंटों ने अहमदीनेजाद को उस गाड़ी में बिठाया और तेजी से सुरक्षित निकालते हुए ईरान के भीतर ही एक खुफिया सेफ हाउस में पहुंचा दिया। योजना के तहत उन्हें सुरक्षित रखने और फिर अनुकूल समय आने पर नए शासक के रूप में पेश करने की तैयारी थी।

लेकिन यहीं पर आकर पूरा खेल बिगड़ गया। अहमदीनेजाद को जल्द ही इस पूरी योजना की हकीकत समझ आने लगी। उन्हें लगने लगा कि इजरायल की यह योजना बेहद अवास्तविक है और वह महज एक मोहरा बनकर रह जाएंगे। वे इस सुरक्षा चक्र और वादों से निराश हो गए। बेहद रहस्यमयी परिस्थितियों में वह उस सेफ हाउस से बाहर निकल गए।


फिलहाल क्या है अहमदीनेजाद की स्थिति

इस असफल ऑपरेशन के बाद अहमदीनेजाद लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से गायब रहे। हालांकि, कुछ समय पहले ही उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम संस्कार यात्रा के दौरान देखा गया था। उनकी हालत काफी कमजोर और थकी हुई दिख रही थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि ईरानी अधिकारियों को उनकी इस संदिग्ध गतिविधियों की भनक लग चुकी थी। खासकर बुडापेस्ट यात्रा के दौरान बॉडीगार्ड्स को चकमा देने की घटना के बाद से ही वे उन पर नजर रख रहे थे। वर्तमान में अहमदीनेजाद को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की खुफिया शाखा ने अपनी हिरासत में ले रखा है और वह तेहरान में अपने घर पर कड़ी नजरबंदी में हैं।

यद्यपि इजरायल और ईरान दोनों ही सरकारों ने इस पूरी रिपोर्ट पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, लेकिन खुफिया गलियारों में इस खुलासे ने खलबली मचा दी है।


अगला कदम क्या होना चाहिए

अगर आप अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक राजनीति में रुचि रखते हैं, तो इस पूरे मामले पर नजर रखना बेहद जरूरी है। मिडल ईस्ट की राजनीति तेजी से करवट बदल रही है। इस घटनाक्रम को समझने के लिए आपको इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  1. मिडल ईस्ट के समाचार स्रोतों को ट्रैक करें: इस मामले से जुड़े अपडेट्स के लिए केवल मुख्यधारा की मीडिया पर निर्भर न रहें। मिडिल ईस्ट आई (Middle East Eye), हारेत्ज़ (Haaretz) और अल जज़ीरा जैसे क्षेत्रीय और खोजी पत्रकारिता से जुड़े स्रोतों को पढ़ें।
  2. खुफिया रिपोर्टों का विश्लेषण करें: न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य वैश्विक अखबारों द्वारा समय-समय पर जारी होने वाली खोजी रिपोर्ट्स के मुख्य बिन्दुओं को समझें। यह केवल जासूसी कहानी नहीं बल्कि भू-राजनीति की असली तस्वीर दिखाती है।
  3. ईरान के घरेलू हालातों को समझें: ईरान के भीतर सत्ता और जनता के बीच बढ़ती दूरी को समझने की कोशिश करें, क्योंकि भविष्य में किसी भी बड़े बदलाव की नींव यहीं से रखी जाएगी।

यह पूरी घटना साबित करती है कि वैश्विक राजनीति में न तो कोई स्थाई दुश्मन होता है और न ही कोई स्थाई दोस्त। सत्ता की बिसात पर मोहरे कभी भी बदल सकते हैं।

LS

Lin Sharma

With a passion for uncovering the truth, Lin Sharma has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.